“सुन्दरकाण्ड” १२५ – दोहा २५

हरि प्रेरित तेहि अवसर चले मरूत उनचास
अट्टहास करि गर्जा कपि बढ़ि लाग अकास !!

देह बिसाल परम हरुआई !
मंदिर तें मंदिर चढ़ धाई !!

जरइ नगर भा लोग बिहाला !
झपट लपट बहु कोटि कराला !!

अर्थ :— उस समय भगवानकी प्रेरणासे उनचासों पवन चलने लगे ! हनुमानजी अट्टहास करके गर्जे और बढ़कर आकाशसे जा लगे !!

देह बड़ी विशाल , परन्तु बहुत ही ( फुर्तीली ) हैं !वे दैडकर एक महलसे दूसरे महलपर चढ़ जाते हैं ! नगर जल रहा हैं , लोग बेहाल हो गये हैं ! आगकी करोडों भयंकर लपटें झपट रही हैं !!

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